सोचिए, आपने दोपहर के खाने के बाद बस 10 मिनट के लिए फ़ोन उठाया। इरादा था कि एक रेसिपी देखनी है या कोई टिकट बुक करना है। लेकिन Chrome खोलते ही पता चलता है कि 47 टैब पहले से खुले पड़े हैं, एड्रेस बार में कुछ लिखने पर हिंदी और अंग्रेज़ी का घालमेल हो जाता है, और पेज स्क्रॉल करते-करते उँगली थक जाती है। यह सीन शायद आपके लिए भी जाना-पहचाना हो।
Chrome ज़्यादातर लोगों के फ़ोन का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला ऐप है, फिर भी हम उसकी बुनियादी सुविधाओं तक ही सीमित रह जाते हैं। कुछ छोटी-छोटी तरकीबें ब्राउज़िंग का अनुभव काफ़ी बदल सकती हैं। यहाँ ऐसी 9 तरकीबें हैं जो Android पर Chrome चलाने वाले हर भारतीय यूज़र के काम आएँगी, चाहे आप मोबाइल डेटा पर हों या घर के Wi-Fi पर। मेन्यू के नाम फ़ोन और Chrome के वर्ज़न के हिसाब से थोड़े अलग दिख सकते हैं।
1. एक झटके में सारे टैब बंद करना
मान लीजिए आपने शॉपिंग के लिए Flipkart, Amazon और Myntra के साथ तीन-चार और साइटें खोल रखी हैं। अब फ़ोन धीमा लग रहा है और आप सब एक साथ बंद करना चाहते हैं। हर टैब पर जाकर छोटे-से ‘x’ को दबाना उबाऊ है।
Android पर Chrome में ऊपर दाईं ओर जो चौकोर डिब्बा या संख्या दिखती है, उस पर टैप करें। अब सारे खुले टैब दिखेंगे। यहाँ तीन बिंदुओं वाले मेन्यू में जाकर ‘Close all tabs’ चुनें। एक ही बार में सब साफ़।
आम चूक यह है कि लोग हर टैब को स्वाइप करके बंद करते हैं। बीच के दो-चार टैब रखने हों तब यह ठीक है, लेकिन पूरी सफ़ाई के लिए मेन्यू वाला तरीक़ा तेज़ है। ध्यान रखें कि Incognito टैब इससे बंद नहीं होते, उन्हें Incognito वाले हिस्से में जाकर अलग से बंद करना पड़ता है।
अगर ग़लती से सारे टैब बंद हो जाएँ, तो घबराइए नहीं। मेन्यू खोलकर ‘Recent tabs’ में जाएँ, वहाँ हाल में बंद किए पेज दोबारा खोले जा सकते हैं। यह तब भी काम आता है जब फ़ोन अचानक रीस्टार्ट हो जाए। जो टैब आप रोज़ खोलते हैं, उन्हें बंद करने की जगह टैब ग्रुप में रख लेना भी अच्छा तरीक़ा है।
2. एड्रेस बार को कैलकुलेटर की तरह इस्तेमाल करना
दोस्तों के साथ बैठे हैं और बिल बाँटना है। कुल 1876 रुपये का बिल आया और 4 लोग हैं। कैलकुलेटर ऐप खोलने की ज़रूरत नहीं, Chrome का एड्रेस बार ही काफ़ी है।
एड्रेस बार में 1876/4 लिखिए। नीचे सुझावों में ही जवाब 469 दिख जाएगा। जोड़, घटाव, गुणा और भाग सब हो जाते हैं। आप 45*17 (जवाब 765) या 3500-1275 (जवाब 2225) जैसा कुछ भी लिख सकते हैं।
फ़ायदा यह है कि अलग ऐप नहीं खोलना पड़ता, ख़ासकर तब जब आप Chrome में कुछ पढ़ रहे हों और बीच में हिसाब निकालना हो। यह जवाब Google सर्च के सुझावों से आता है, इसलिए इसके लिए इंटरनेट और सर्च सुझाव चालू होने चाहिए। अगर हिंदी कीबोर्ड चल रहा है, तो संख्याएँ लिखने के लिए अंग्रेज़ी कीबोर्ड पर लौटना न भूलें, वरना हिसाब दिखाई नहीं देगा।
3. पेज को बोलकर सुनना
सफ़र में या आँखों को आराम देते हुए कोई लेख सुनना हो, तो Chrome की यह सुविधा काम आती है। मान लीजिए बस में झटके लग रहे हैं और लंबी ख़बर पढ़ना मुश्किल है।
Android पर Chrome में कोई पेज खोलिए, तीन बिंदुओं वाले मेन्यू में ‘Listen to this page’ चुनिए। Chrome पेज पढ़कर सुनाने लगेगा। नीचे एक छोटा प्लेयर खुलेगा जिसमें प्ले, पॉज़, आगे-पीछे जाने के बटन होंगे और आप गति भी बदल सकते हैं।
यह सुविधा हर फ़ोन, हर भाषा और हर पेज पर नहीं मिलती। अंग्रेज़ी पर यह सबसे अच्छा चलती है, और हिंदी में आवाज़ थोड़ी मशीन जैसी लग सकती है, पर समझने में दिक़्क़त कम होती है। अगर किसी पेज पर विकल्प दिखे ही नहीं, तो इसका मतलब है कि वह पेज या भाषा उस सुविधा के साथ नहीं चलती।
रात में सोने से पहले कुछ सुनना हो तो आवाज़ धीमी रखें और ईयरफ़ोन लगा लें। साथ ही याद रखें कि स्क्रीन बंद होने पर भी ऑडियो चलता रह सकता है, इसलिए सुनते-सुनते नींद आ जाए तो बैटरी ख़र्च होती रहेगी।
4. डेटा बचाने के सही तरीक़े
भारत में हर किसी के पास असीमित डेटा नहीं होता। बहुत-से लोग रोज़ 1 या 1.5 GB के प्लान पर चलते हैं, इसलिए हर मेगाबाइट मायने रखता है। पहले Chrome में Lite mode या Data Saver नाम की सुविधा होती थी, जो पेज को छोटा करके भेजती थी। अब वह Chrome में उपलब्ध नहीं है, इसलिए पुरानी वेबसाइटों पर जो सलाह मिलती है कि “Lite mode चालू करें”, उसे आज़माने में समय न गँवाएँ।
आज डेटा बचाने के लिए कुछ और रास्ते हैं। पहला, फ़ोन की अपनी सेटिंग में Data Saver चालू करें। इससे ज़्यादातर ऐप बैकग्राउंड में डेटा नहीं खाते। जिस ऐप को हमेशा चलना है, उसे छूट दी जा सकती है। दूसरा, Chrome की सेटिंग में ‘Privacy and security’ के अंदर ‘Preload pages’ देखें। यह सुविधा आगे के पेज पहले से लोड करके रखती है और इस वजह से ज़्यादा डेटा ले सकती है। इसे बंद करने से डेटा कुछ बच सकता है, पर पेज खुलने में थोड़ा समय लग सकता है।
तीसरा तरीक़ा है पेज को ऑफ़लाइन सहेजना। जब Wi-Fi मिले, तब Chrome के मेन्यू में डाउनलोड का विकल्प चुनकर ज़रूरी लेख सेव कर लें और बाद में बिना डेटा के पढ़ें। लंबी ख़बरें या रेसिपी जैसी चीज़ों के लिए यह सुविधाजनक है।
एक बात और, वीडियो और बड़ी तस्वीरों वाली साइटें सबसे ज़्यादा डेटा खाती हैं। मोबाइल डेटा पर इनसे बचें और इन्हें Wi-Fi के लिए रख लें।
5. एक ही पेज पर कुछ ढूँढना
किसी लंबे लेख या Wikipedia पेज पर आप कोई ख़ास शब्द ढूँढ रहे हैं। पूरा पेज ऊपर से नीचे तक पढ़ना समय की बर्बादी है। Chrome का ‘Find in page’ यह काम सेकंडों में कर देता है।
तीन बिंदुओं वाले मेन्यू में ‘Find in page’ चुनिए। ऊपर एक छोटी खोज पट्टी खुलेगी। वहाँ अपना शब्द लिखिए, जैसे ‘budget’ या ‘चुनाव’। Chrome उस शब्द को पेज पर रंग देगा, और ऊपर-नीचे के तीरों से आप अगले या पिछले स्थान पर जा सकते हैं।
यह तरकीब तब बहुत काम आती है जब आप लंबी नियम-शर्तों वाला पेज पढ़ रहे हों, या किसी रेसिपी में देखना हो कि ‘नमक’ कितनी बार आया है। आम ग़लती यह है कि लोग शब्द एड्रेस बार में लिखकर खोज देते हैं, जिससे Google पर नई खोज खुल जाती है। Find in page सिर्फ़ उसी पेज के अंदर ढूँढता है।
6. होमपेज और डिफ़ॉल्ट सर्च इंजन बदलना
Chrome खोलते ही आपको क्या दिखता है? अक्सर Google का सर्च बॉक्स या पिछली बार खुले हुए टैब। लेकिन आप अपनी पसंद की कोई भी साइट होमपेज बना सकते हैं।
सेटिंग में जाकर ‘Homepage’ देखें। वहाँ आप कोई भी पता डाल सकते हैं, जैसे अपनी पसंदीदा समाचार साइट या क्रिकेट स्कोर वाला पेज। अब होम बटन दबाने पर वही साइट खुलेगी। यह उनके लिए बढ़िया है जो रोज़ एक ही वेबसाइट सबसे पहले देखते हैं।
इसी तरह ‘Search engine’ में डिफ़ॉल्ट सर्च इंजन भी बदला जा सकता है। Google के अलावा Bing, Yahoo या DuckDuckGo जैसे विकल्प मिल सकते हैं, जो आपके इलाक़े और Chrome के वर्ज़न पर निर्भर करता है। अगर निजता आपके लिए ज़्यादा मायने रखती है तो DuckDuckGo आज़मा सकते हैं। हिंदी और स्थानीय जानकारी के लिए बहुत-से लोग Google से ही संतुष्ट रहते हैं।
एक आम उलझन होमपेज और नए टैब के पेज को लेकर होती है। होमपेज वह है जो होम बटन दबाने पर खुलता है। नए टैब का पेज वह है जो नया टैब खोलने पर दिखता है। दोनों की सेटिंग अलग-अलग जगह होती है।
7. पासवर्ड मैनेजर का सही इस्तेमाल
कितने लोग हर जगह एक ही पासवर्ड रखते हैं? शायद आप भी। Chrome में Google का पासवर्ड मैनेजर जुड़ा है, जो अलग-अलग मज़बूत पासवर्ड रखने में मदद करता है। नई साइट पर रजिस्टर करते समय Chrome एक मज़बूत पासवर्ड सुझाता है, उसे सेव कर लेता है और अगली बार अपने आप भर देता है। सेव किए पासवर्ड आप सेटिंग में ‘Password Manager’ खोलकर देख सकते हैं।
सुरक्षा के लिहाज़ से एक बात ज़रूरी है। अगर आपके फ़ोन का लॉक कमज़ोर है या लॉक है ही नहीं, तो फ़ोन किसी और के हाथ लगने पर आपके खातों तक पहुँचना आसान हो जाता है। इसलिए फ़ोन में पिन, पैटर्न या फ़िंगरप्रिंट लॉक ज़रूर रखें, और Google खाते में 2-स्टेप वेरिफ़िकेशन चालू करें।
Chrome की सेटिंग में ‘Safety check’ भी है, जो बता सकता है कि आपका कोई सेव किया पासवर्ड लीक तो नहीं हुआ या बहुत कमज़ोर तो नहीं है। कभी-कभी उसे चला लेना अच्छी आदत है।
बैंकिंग और UPI जैसी संवेदनशील जगहों के लिए ज़्यादा सावधानी रखें। UPI पिन या कार्ड का पिन कभी भी ब्राउज़र में सेव न करें और न किसी को बताएँ। नेट बैंकिंग का पासवर्ड ब्राउज़र में सेव करना है या नहीं, यह आपके जोखिम का फ़ैसला है। सबसे सुरक्षित तरीक़ा यह है कि इसे याद रखें या किसी अलग भरोसेमंद पासवर्ड ऐप में रखें।
8. Desktop site से पूरी वेबसाइट देखना
कई वेबसाइटों का मोबाइल रूप बहुत सीमित होता है। कुछ विकल्प और फ़ॉर्म सिर्फ़ डेस्कटॉप रूप में दिखते हैं, ख़ासकर कुछ सरकारी या पुरानी साइटों पर। ऐसे में मोबाइल रूप में काम अटक जाता है।
Chrome में किसी भी पेज पर तीन बिंदुओं वाले मेन्यू से ‘Desktop site’ पर टिक लगाइए। पेज दोबारा लोड होगा और वैसा दिखेगा जैसा कंप्यूटर पर दिखता है। लिखावट छोटी हो जाएगी, इसलिए ज़ूम करके पढ़ना पड़ सकता है।
जब कोई साइट बार-बार अपना ऐप डाउनलोड करने को कहती है, तब भी यह तरकीब कई बार काम आ जाती है, क्योंकि डेस्कटॉप रूप में वह संदेश हमेशा नहीं आता। पर ध्यान रखें कि डेस्कटॉप पेज भारी होते हैं और डेटा ज़्यादा लगता है। इसलिए ज़रूरत पड़ने पर ही चालू करें और काम ख़त्म होते ही बंद कर दें।
9. Incognito मोड का सही मतलब समझना
बहुत-से लोग मानते हैं कि Incognito मोड में वे पूरी तरह अदृश्य हो जाते हैं। यह सच नहीं है। यह मोड सिर्फ़ आपके फ़ोन पर हिस्ट्री, कुकी और फ़ॉर्म में भरी जानकारी सेव नहीं करता।
Incognito टैब खोलने के लिए मेन्यू से ‘New Incognito tab’ चुनें। इसमें की गई ब्राउज़िंग Chrome की हिस्ट्री में नहीं आएगी, और टैब बंद करते ही कुकी भी हट जाती हैं। यह तब काम आता है जब आप किसी और के फ़ोन पर कुछ देख रहे हों, या किसी के लिए तोहफ़ा खरीद रहे हों और सरप्राइज़ बचाना हो।
लेकिन आपका इंटरनेट प्रोवाइडर, दफ़्तर का नेटवर्क और वेबसाइट ख़ुद अब भी देख सकती हैं कि आपने क्या खोला। इसलिए Incognito निजता का पूरा इलाज नहीं है, यह सिर्फ़ आपके फ़ोन के भीतर सफ़ाई रखता है। इसे बैंकिंग के लिए “ज़्यादा सुरक्षित” मान लेना भी ग़लत है, क्योंकि यह कोई अतिरिक्त सुरक्षा परत नहीं जोड़ता।
अगर आप Incognito टैब खुले छोड़कर फ़ोन किसी को देते हैं, तो Chrome की सेटिंग में Incognito टैब को स्क्रीन लॉक या फ़िंगरप्रिंट से बंद रखने का विकल्प देखें। वह सुविधा आपके फ़ोन और Chrome के वर्ज़न पर निर्भर करती है।
जल्दी देखने की चेकलिस्ट: इन 9 तरकीबों को आज़माने का तरीक़ा
सारी तरकीबें एक साथ याद रखना मुश्किल है। यह छोटी चेकलिस्ट काम आएगी। जब भी Chrome खोलें, इनमें से कोई एक आज़माएँ। धीरे-धीरे सब आदत बन जाएँगी।
- आज ही करें: सेटिंग में जाकर होमपेज अपनी पसंदीदा साइट पर लगाएँ।
- कल करें: 20 टैब खुले हों तो ‘Close all tabs’ से सफ़ाई करें।
- इस हफ़्ते: किसी लंबे लेख पर ‘Listen to this page’ आज़माएँ और देखें कि आवाज़ कैसी लगती है।
- डेटा बचाना है: फ़ोन का Data Saver और Chrome का ‘Preload pages’ देखें, और ज़रूरी लेख Wi-Fi पर ऑफ़लाइन सेव कर लें।
- ज़रूरत पड़ने पर: कोई फ़ॉर्म न भर पाएँ तो Desktop site चालू करें।
- हमेशा याद रखें: फ़ोन में स्क्रीन लॉक रखें, UPI पिन ब्राउज़र में सेव न करें, और Incognito को पूरी निजता न मानें।
- छोटा काम: अगली बार बिल बाँटना हो तो एड्रेस बार में ही हिसाब करें।
इन छोटी आदतों से मोबाइल पर ब्राउज़िंग काफ़ी आसान हो जाएगी। Chrome सिर्फ़ एक ब्राउज़र नहीं, पूरा औज़ार-बक्सा है, बस सही औज़ार चुनना आना चाहिए।





