सोचिए, महीने की शुरुआत में salary आई, पूरा plan बना कि इस बार बचत ज़रूर करेंगे। फिर बीच महीने में देखा कि account में बहुत कम पैसे बचे हैं। सवाल वही पुराना, आख़िर गए कहाँ? दिक्कत यह नहीं कि आप कमाते कम हैं, दिक्कत यह है कि छोटे-छोटे खर्चों का कोई record नहीं रहता। UPI से दिन में दस-पंद्रह payment हो जाते हैं, हर बार लगता है कि बस पचास या सौ रुपये का ही तो मामला है, लेकिन महीने के आख़िर में यही छोटी रकम मिलकर बड़ी हो जाती है।
अच्छी बात यह है कि अब ज़्यादातर लोगों के पास smartphone है और रोज़ का हिसाब रखने के लिए किसी बड़े register की ज़रूरत नहीं। कुछ आसान apps आपकी यह मेहनत आधी कर सकती हैं। ये apps न सिर्फ खर्च लिखने में मदद करती हैं, बल्कि यह भी दिखाती हैं कि पैसा किस जगह ज़्यादा जा रहा है। आइए आठ ऐसे apps और तरीकों के बारे में बात करते हैं, जिन्हें भारत में कोई भी आसानी से use कर सकता है। कुछ apps के कुछ फीचर paid हो सकते हैं, इसलिए पहले मुफ्त हिस्सा आज़माकर देखिए।
एक चेतावनी पहले ही: कुछ पुराने मशहूर apps बदल चुके हैं। जैसे Walnut, जो SMS से हिसाब रखने के लिए जाना जाता था, अब Axio के नाम से चलता है और उसका ध्यान ज़्यादातर कर्ज़ और credit पर है। इसलिए इस सूची में हमने उसे नहीं रखा है।
1. Money View: SMS से अपने आप हिसाब
अगर आप हर खर्च खुद लिखना भूल जाते हैं, तो ऐसा app काम आता है जो bank के SMS पढ़कर entries बना दे। Money View इसी तरह का एक जाना-पहचाना भारतीय app है। यह मूल रूप से कर्ज़ और credit से जुड़ा app है, पर उसमें खर्च का हिसाब रखने वाला हिस्सा भी है। जब आप UPI से payment करते हैं या ATM से पैसे निकालते हैं, तो उसका SMS पढ़कर app उसे खर्च की तरह दर्ज कर सकता है।
इसके लिए आपको app को SMS पढ़ने की permission देनी होती है। यह permission सोच-समझकर दीजिए और app की privacy policy एक बार देख लीजिए। अगर आप SMS access नहीं देना चाहते, तो नीचे बताए दूसरे apps में से कोई चुन लीजिए, जहाँ entry आप खुद करते हैं।
कैसे करें शुरुआत
- Google Play Store से app install करें और mobile number से login करें।
- SMS permission देने से पहले तय करें कि आप इसमें सहज हैं या नहीं।
- कुछ दिन बाद देखें कि entries सही category में गई हैं या नहीं, और गलत category को खुद बदल दें।
- Cash का खर्च खुद जोड़ें, क्योंकि उसका SMS नहीं आता।
एक बात का ध्यान रखें: इस तरह के apps में कर्ज़ और credit के ऑफ़र बार-बार दिख सकते हैं। हिसाब रखने का मकसद खर्च समझना है, कर्ज़ लेना नहीं। बिना ज़रूरत किसी ऑफ़र पर क्लिक न करें। और यह भी याद रखें कि SMS से सिर्फ वही लेन-देन पकड़ में आते हैं जिनका message आपके phone पर आया हो।
2. Money Manager: आसान और साफ तरीका
अगर आप खुद हर खर्च लिखना पसंद करते हैं और चाहते हैं कि app बहुत जटिल न हो, तो Money Manager एक अच्छा विकल्प है। इसका interface बहुत सीधा है। ऊपर आपको महीने का कुल खर्च, कुल आमदनी और बचत दिखती है। नीचे आप जोड़ते जाते हैं कि आज क्या-क्या खर्च हुआ।
इस app की खासियत यह है कि इसमें आप अपनी अलग-अलग categories बना सकते हैं। मान लीजिए आप रोज़ दूध, सब्ज़ी और राशन पर खर्च करते हैं, तो आप एक category बना सकते हैं जिसका नाम होगा घर का सामान। इसी तरह बच्चों की school fees, दवाइयाँ, पेट्रोल, सबके लिए अलग-अलग headings बनाई जा सकती हैं।
सही तरीके से entry करना
- हर रात सोने से पहले दिन भर के खर्च याद करके add करें।
- छोटी रकम को भी न छोड़ें, जैसे चाय के दस रुपये या parking के बीस रुपये।
- हफ्ते में एक बार category-wise report देखें।
- जो category ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ रही हो, उस पर ध्यान दें।
Money Manager में आप अपना budget भी set कर सकते हैं। जैसे आपने तय किया कि इस महीने बाहर खाने पर सिर्फ पंद्रह सौ रुपये खर्च होंगे। जैसे-जैसे आप entries करते जाएँगे, app दिखाता रहेगा कि उस limit का कितना हिस्सा use हो चुका है। इससे खर्च करते वक्त थोड़ी सावधानी अपने आप आ जाती है।
3. Monefy: एक tap में खर्च जोड़ें
Monefy उन लोगों के लिए बना है जिन्हें लंबी-चौड़ी entries भरना पसंद नहीं। इसमें बस app खोलिए, category चुनिए, रकम डालिए और save दबाइए। हो गया। कुछ ही seconds में आपका खर्च दर्ज हो जाता है। इसकी design ऐसी है कि सब कुछ एक ही screen पर दिखता है, इसलिए confusion नहीं होता।
मान लीजिए आप office जाते वक्त auto से गए और किराया अस्सी रुपये दिया। आपने Monefy खोला, transport वाला icon चुना, 80 लिखा और बस। शाम को चाय पी, तो food category में पंद्रह रुपये जोड़ दिए। दिन भर में दस-बारह छोटे-छोटे खर्चों को दर्ज करना भी बोझ नहीं लगता।
किन बातों का रखें ध्यान
- शुरुआत में कुछ दिन entries करना अजीब लग सकता है, लेकिन आदत बनते ही आसान हो जाता है।
- हर खर्च के बाद तुरंत entry करना सबसे सही रहता है, बाद में भूल जाते हैं।
- अपनी सबसे ज़्यादा use होने वाली categories को पहले रखें ताकि ढूँढना न पड़े।
- महीने के आखिर में graph देखकर समझें कि कहाँ कटौती की जा सकती है।
Monefy का free version रोज़मर्रा के हिसाब के लिए काफी है। इसमें आपको हर दिन, हफ्ते या महीने का कुल खर्च साफ दिखता है। जो लोग सोचते हैं कि expense tracking मुश्किल है, उन्हें यह app ज़रूर आज़मानी चाहिए।
4. Spendee: परिवार के साथ shared हिसाब
कई बार घर का खर्च सिर्फ एक इंसान नहीं देखता। पति-पत्नी दोनों कमाते हैं और दोनों ही घर का सामान लाते हैं। ऐसे में अलग-अलग diary या अलग-अलग apps में entries रखने से पूरा हिसाब नहीं मिलता। Spendee इस समस्या का हल निकालता है क्योंकि इसमें आप shared wallet बना सकते हैं (shared wallet जैसे कुछ फीचर paid plan में हो सकते हैं, इसलिए पहले देख लें)।
मतलब आपने और आपके partner ने एक साझा budget बनाया। अब जो भी घर के लिए कुछ खरीदता है, वह उसी shared wallet में entry कर देता है। दूसरे को तुरंत update दिख जाता है। इससे यह झगड़ा भी खत्म होता है कि इस महीने किसने ज़्यादा खर्च किया और किसने कम।
कैसे बनाएँ shared wallet
- Spendee install करें और account बनाएँ।
- अपने partner को invite भेजें।
- एक wallet का नाम रखें, जैसे घर का खर्च।
- दोनों उसमें अपनी-अपनी entries जोड़ते रहें।
Spendee में आप cash, bank account और card के हिसाब से भी पैसों को अलग-अलग रख सकते हैं। जैसे आपके पास wallet में दो हज़ार cash हैं, account में salary आई है, और credit card से कुछ खरीदा है। इन सबकी स्थिति एक ही जगह दिख जाती है। इससे पता चलता है कि असल में आपके पास कितना पैसा बचा है और कितना उधार चुकाना है।
5. Goodbudget: पुराने envelope system का नया रूप
हमारे घरों में पहले लोग पैसों को अलग-अलग लिफाफों में रखते थे। एक लिफाफा राशन के लिए, एक बिजली-पानी के bill के लिए, एक बच्चों की पढ़ाई के लिए। Goodbudget इसी तरीके को phone पर ले आया है। इसमें आप अपनी पूरी आमदनी को अलग-अलग envelopes में बाँट देते हैं।
मान लीजिए आपकी monthly salary पचास हज़ार है। आपने तय किया कि दस हज़ार किराया, आठ हज़ार राशन, पाँच हज़ार travel, सात हज़ार बचत और बाकी दूसरे खर्च। Goodbudget में आप ये सारे envelope बना लेते हैं। अब जब भी आप राशन खरीदते हैं, उस envelope से पैसा घटता जाता है। जब envelope खाली हो जाए, तो समझ जाइए उस category की limit पूरी हो गई।
envelope system क्यों काम करता है
- आपको हर category की सीमा पहले से पता रहती है।
- हर खर्च के साथ envelope में पैसा घटता दिखता है, इसलिए सीमा का अंदाज़ा बना रहता है।
- बचत को भी एक envelope की तरह treat किया जाता है, इसलिए वह भी पक्की होती है।
- महीने के आखिर में साफ दिखता है कि कौन सी category बार-बार ओवर हो रही है।
Goodbudget का free version सीमित envelopes देता है, लेकिन शुरुआत के लिए वह काफी है। अगर आपको लगता है कि salary आते ही सारा पैसा हाथ से निकल जाता है, तो यह तरीका आपके लिए फायदेमंद रहेगा। पहले महीने में ही आपको समझ आ जाएगा कि किस मद में ज़रूरत से ज़्यादा पैसा जा रहा है।
6. Money Lover: wallets, budget और bills एक जगह
Money Lover उन लोगों के लिए है जिन्हें हिसाब के साथ-साथ थोड़ी योजना भी चाहिए। इसमें आप अलग-अलग wallets बना सकते हैं, जैसे cash, bank account और पुरानी बचत। हर खर्च को category में डालते हैं, और app महीने के आख़िर में दिखाता है कि कहाँ कितना गया।
इसकी काम की बात budget और bills वाला हिस्सा है। आप किसी category के लिए महीने की सीमा रख सकते हैं, जैसे बाहर खाने के लिए पंद्रह सौ रुपये। जो खर्च हर महीने दोहराते हैं, जैसे बिजली का bill, mobile recharge या किराया, उन्हें recurring entry की तरह रखा जा सकता है ताकि हर बार नए सिरे से न लिखना पड़े। Bill की तारीख पर reminder मिलने से late fee से बचने में भी मदद मिलती है।
इसे कैसे इस्तेमाल करें
- सबसे पहले अपने असली पैसों के हिसाब से wallets बनाइए: cash और bank अलग-अलग।
- सिर्फ चार-पाँच मुख्य categories रखिए, ताकि entry करना भारी न लगे।
- महीने के बड़े खर्च, जैसे किराया और recharge, recurring में डाल दीजिए।
- हफ्ते में एक बार budget की स्थिति देखिए।
कई फीचर, जैसे अलग-अलग devices पर sync, account बनाने या paid plan पर निर्भर हो सकते हैं। इसलिए शुरुआत मुफ्त हिस्से से कीजिए और जब लगे कि आपको सच में उसकी ज़रूरत है, तभी आगे सोचिए।
7. Bluecoins: reports और charts के शौकीनों के लिए
Bluecoins उन लोगों को पसंद आता है जो आँकड़ों को charts और graphs में देखना चाहते हैं। यह app आपके हर खर्च को अलग-अलग तरीकों से दिखा सकती है। किस महीने कितना खर्च हुआ, किस category का कितना हिस्सा रहा, cash और bank में कितना बचा, सब कुछ रंगीन charts में मिलता है।
इसकी मदद से आप दो महीनों की तुलना आसानी से कर सकते हैं। जैसे जनवरी में आपने travel पर चार हज़ार खर्च किए और फरवरी में छह हज़ार। Bluecoins आपको यह फर्क graph में दिखा देगा। फिर आप सोच सकते हैं कि फरवरी में travel ज़्यादा क्यों हुआ और क्या यह ज़रूरी था।
कौन सी reports सबसे काम की हैं
- Category-wise monthly report, जिससे पता चले कि सबसे ज़्यादा पैसा कहाँ गया।
- Income vs expense report, जिससे बचत का सही आँकड़ा मिले।
- Payment mode report, जिससे पता चले कि cash ज़्यादा use हो रहा है या UPI।
- Yearly trend, जिससे लंबी अवधि की आदतें समझ आएँ।
Bluecoins की खास बात यह है कि यह बिना internet के भी चलती है और आपका data phone में रहता है। इसलिए backup लेकर दूसरी जगह रखना आपकी ज़िम्मेदारी है, वरना phone बदलने पर data जा सकता है। कुछ फीचर paid हो सकते हैं। जो लोग हर चीज़ का सटीक हिसाब चाहते हैं, उनके लिए यह एक भरोसेमंद साथी है।
8. Google Sheets: जो हर किसी के पास पहले से है
कई लोग भूल जाते हैं कि Google Sheets उनके phone में पहले से मौजूद होती है या Play Store से मुफ्त मिल जाती है। अगर आप कोई नया app install नहीं करना चाहते, तो Sheets में अपना पूरा expense tracker बना सकते हैं। यह तरीका थोड़ा manual है, लेकिन पूरी तरह आपके control में होता है।
आप एक simple table बना सकते हैं जिसमें date, category, description, amount और payment mode के columns हों। हर रोज़ इसमें entries भरते जाएँ। महीने के आखिर में sum formula लगाकर कुल खर्च निकाल लें। आप चाहें तो हर category का अलग total भी निकाल सकते हैं।
Sheets में tracker कैसे बनाएँ
- Google Sheets खोलें और नई sheet बनाएँ।
- ऊपर की row में headings लिखें: Date, Item, Category, Amount, Mode।
- हर खर्च के बाद एक row भरें।
- महीने के आखिर में Amount column को select करके sum करें।
इस तरीके का फायदा यह है कि SMS पढ़ने जैसी किसी बड़ी permission की ज़रूरत नहीं पड़ती। आपका data आपके अपने Google account में रहता है और आप उसे किसी भी device से खोल सकते हैं। थोड़ी मेहनत ज़्यादा लगती है, लेकिन जो लोग खुद सब कुछ लिखना पसंद करते हैं, उनके लिए यह perfect है।
शुरू करने से पहले एक छोटी checklist
कोई भी app चुनने से पहले कुछ बातें तय कर लेना समझदारी है। वरना दो-चार दिन use करने के बाद app बदलते रहते हैं और आदत नहीं बन पाती। नीचे दी गई बातों पर एक नज़र डाल लीजिए।
- पहले तय करें कि आपको automatic tracking चाहिए या खुद entry करना ठीक लगता है।
- जो app चुनें, उसमें categories अपनी ज़रूरत के हिसाब से बदल सकते हों, यह देख लें।
- शुरुआत के पंद्रह दिन सिर्फ record करें, कुछ बदलने की कोशिश न करें।
- हर रविवार को पाँच मिनट निकालकर हफ्ते भर का खर्च देखें।
- जो category सबसे ज़्यादा बढ़ रही हो, उसके लिए अगले हफ्ते एक छोटा लक्ष्य रखें।
- जो app SMS पढ़ने की permission माँगे, उसकी privacy policy एक बार पढ़ लें।
- cash खर्च को भी लिखना न भूलें, सिर्फ UPI वाले transactions ही पूरा हिसाब नहीं होते।
- महीने के आखिर में income और expense का मिलान करें और बचत को अलग से note करें।
रोज़ का हिसाब रखना कोई बड़ी बात नहीं है, बस शुरुआत करनी पड़ती है। एक बार जब आपको दिखने लगेगा कि पैसा कहाँ जा रहा है, तो आप खुद ही समझदारी से खर्च करने लगेंगे। कोई भी app आपके पैसे नहीं बचाती, बचत तो आपकी आदतों से आती है। ये apps सिर्फ आईना दिखाती हैं कि असल में हो क्या रहा है।





