रोज़ की आदतें सुधारने वाले 7 हैबिट ट्रैकर ऐप्स

Loop, Habitica, HabitNow और Google Calendar जैसे सात ऐप्स और तरीक़ों से जानिए कि आपकी आदतों के लिए कौन-सा ट्रैकर ठीक रहेगा, और शुरुआत में कौन-सी ग़लतियाँ टालनी चाहिए।

रोज़ की आदतें सुधारने वाले 7 हैबिट ट्रैकर ऐप्स

सुबह का अलार्म बजता है, आप आँखें मलते हुए फ़ोन उठाते हैं और सोचते हैं कि आज से सब कुछ बदलेगा। जल्दी उठेंगे, कसरत करेंगे, किताब पढ़ेंगे, पानी ज़्यादा पिएँगे। फिर दिन चढ़ता है, दफ़्तर के ईमेल आते हैं, थकान होती है और रात को वही पुराना ख़याल लौट आता है कि कल से पक्का शुरू करेंगे। यह चक्र तब तक नहीं टूटता जब तक आप अपनी आदतों को सिर्फ़ याददाश्त के भरोसे छोड़े रखते हैं।

यहीं पर हैबिट ट्रैकर ऐप्स काम आते हैं। ये आपकी इच्छाशक्ति को एक साफ़ बोर्ड में बदल देते हैं, जहाँ हर छोटी जीत दिखती है और छूटा हुआ दिन आपको हल्का-सा धक्का देता है। Play Store पर दर्जनों विकल्प हैं, इसलिए इस लेख में सात ऐसे ऐप्स और तरीक़े चुने गए हैं जो Android फ़ोन पर आसानी से चलते हैं। कोई बहुत सीधा है, कोई आँकड़े पसंद करने वालों के लिए है, और कोई आपकी पूरी दिनचर्या को एक जगह जोड़ देता है।

1. कैसे चुनें अपने लिए सही हैबिट ट्रैकर

सबसे आम ग़लती है सबसे मशहूर ऐप डाउनलोड कर लेना और एक हफ़्ते में उसे छोड़ देना। हर किसी की ज़रूरत अलग होती है। किसी को सिर्फ़ पानी पीने की याद दिलानी है, किसी को पढ़ाई के घंटे गिनने हैं, तो किसी को जिम जाने की कड़ी बनानी है। इसलिए ऐप चुनने से पहले अपनी दो-तीन आदतें काग़ज़ पर लिख लें।

अगर आप पहली बार ट्रैकर इस्तेमाल कर रहे हैं तो ऐसा ऐप लें जो खोलते ही सीधा काम करे। बहुत सारे चार्ट और आँकड़े शुरू में अच्छे लगते हैं, लेकिन रोज़ भरने में बोझ बन जाते हैं। दूसरी बात, देखें कि ऐप बिना इंटरनेट के चलता है या नहीं, क्योंकि हर जगह अच्छा नेटवर्क मिले, यह ज़रूरी नहीं। तीसरी बात, याद दिलाने का तरीक़ा परखें। कुछ ऐप सिर्फ़ नोटिफ़िकेशन भेजते हैं, कुछ आपको बताते हैं कि आपकी लगातार चली आ रही कड़ी टूटने वाली है।

एक और चूक यह होती है कि लोग एक साथ दस आदतें जोड़ देते हैं। पहले हफ़्ते जोश रहता है, फिर एक दिन छूटता है और पूरा सिलसिला बंद हो जाता है। बेहतर है कि तीन आदतों से शुरू करें। जैसे सुबह आधा घंटा सैर, दिन में पर्याप्त पानी और रात को तय समय पर फ़ोन किनारे रख देना। जब ये तीनों चार हफ़्ते तक टिक जाएँ, तब नई आदत जोड़ें।

ऐप में क्या देखें

  • एक टैप में आदत पूरी दर्ज करने का विकल्प हो।
  • सप्ताह या महीने का कैलेंडर दिखता हो।
  • हर आदत का रिमाइंडर अलग समय पर लग सके।
  • डार्क मोड हो, ताकि रात में आँखों पर ज़ोर न पड़े।
  • डेटा का बैकअप या एक्सपोर्ट हो, ताकि फ़ोन बदलने पर सब कुछ न खो जाए।

2. सबसे आसान शुरुआत के लिए Loop Habit Tracker

अगर आपने कभी कोई हैबिट ट्रैकर इस्तेमाल नहीं किया, तो Loop Habit Tracker से शुरुआत करना ठीक रहता है। यह ओपन-सोर्स ऐप है और सीधा-सादा है। खोलिए, आदत का नाम लिखिए, हफ़्ते में कितने दिन करनी है यह चुनिए और रिमाइंडर लगा दीजिए। न लॉगिन, न अकाउंट, न फ़ालतू सवाल।

इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि यह बिना इंटरनेट के चलता है और बहुत हल्का है, इसलिए पुराने Android फ़ोन पर भी अटकता नहीं। हर आदत के आगे छोटे-छोटे खाने बनते हैं। जिस दिन आप काम पूरा करते हैं, उस दिन के खाने पर टैप करते हैं और वह भर जाता है। धीरे-धीरे पूरा हफ़्ता भरा हुआ दिखता है तो अलग ही संतोष मिलता है।

Loop आपकी लगातार चल रही कड़ी यानी स्ट्रीक भी दिखाता है। मान लीजिए आपने पाँच दिन रोज़ किताब पढ़ी, तो स्ट्रीक पाँच दिखेगी। एक दिन छूटा तो वह फिर शून्य से शुरू होती है। कुछ लोगों को यह सख़्त लगता है, लेकिन यही दबाव आपको लापरवाह होने से रोकता है। इसके अलावा ऐप एक स्कोर भी बनाता है, जो बताता है कि आदत कितनी मज़बूत हुई है। एक दिन छूटने पर यह स्कोर अचानक नीचे नहीं गिरता, इसलिए एक चूक से हिम्मत नहीं टूटती।

कमी यह है कि इसमें बहुत गहरे विश्लेषण नहीं हैं। अगर आप जानना चाहते हैं कि कौन-सी आदत किस महीने सबसे ज़्यादा टूटती है, तो आपको दूसरे ऐप भी देखने पड़ सकते हैं। लेकिन शुरुआत के लिए यही ठीक है, क्योंकि ऐप जितना सरल होगा, आप उसे उतनी ही बार खोलेंगे।

3. आदतों को खेल जैसा बनाने के लिए Habitica

कुछ लोगों को सादा टिक लगाने में मज़ा नहीं आता। उन्हें इनाम चाहिए और थोड़ी प्रतिस्पर्धा भी। ऐसे लोगों के लिए Habitica एक अलग ही दुनिया है। यह आपकी ज़िंदगी को रोल-प्लेइंग गेम की तरह देखता है। आपका एक छोटा किरदार बनता है, और आदत पूरी करने पर उसे अनुभव अंक और सोना मिलता है।

Habitica में तीन तरह की चीज़ें होती हैं। Habits वे काम हैं जो आप दिन में कई बार कर सकते हैं, जैसे सीढ़ियाँ चढ़ना या पानी पीना। Dailies वे हैं जो हर दिन या तय दिनों पर करने हैं, जैसे कसरत या दवा लेना। To-Dos वे हैं जो एक बार निपटाने हैं, जैसे बिजली का बिल भरना। काम पूरा करने पर किरदार का स्तर बढ़ता है।

अगर आप कोई रोज़ का काम छोड़ देते हैं, तो आपके किरदार की सेहत घट जाती है। सुनने में यह छोटी बात लगती है, लेकिन अपने बनाए किरदार को कमज़ोर होते देखकर अजीब-सा लगाव हो जाता है। आप अकेले भी खेल सकते हैं और दोस्तों के साथ पार्टी बनाकर भी। पार्टी में कोई साथी अपना काम न करे तो पूरी टीम पर असर पड़ता है, इसलिए दोस्तों के साथ जवाबदेही बढ़ जाती है।

हालाँकि जो लोग बस एक सीधा ट्रैकर चाहते हैं, उन्हें Habitica भारी लग सकता है। शुरू में किरदार बनाने, इनाम चुनने और काम जोड़ने में ही समय निकल जाता है। इसमें अकाउंट बनाना पड़ता है और ज़्यादातर चीज़ें इंटरनेट पर चलती हैं। लेकिन अगर आपको गेम पसंद हैं और चाहते हैं कि आदतें उबाऊ न लगें, तो यह लंबे समय तक आपको जोड़े रख सकता है।

4. पूरी दिनचर्या जोड़ने के लिए Google Calendar

सुनकर अजीब लगे, लेकिन आदतें ट्रैक करने के लिए हमेशा नया ऐप ज़रूरी नहीं होता। ज़्यादातर Android फ़ोन में पहले से मौजूद Google Calendar भी इस काम आ सकता है। फ़ायदा यह है कि आप इसे पहले से देखते हैं, उसमें आपकी मीटिंग, जन्मदिन और बाकी काम पहले से होते हैं। आदतें भी वहीं होंगी तो पूरा दिन एक नज़र में दिखेगा।

तरीक़ा सीधा है। हर आदत के लिए एक इवेंट बनाइए और उसे रोज़ दोहराने पर लगा दीजिए। जैसे सुबह छह से सात बजे तक “सैर”, और शाम सात बजे “10 पन्ने पढ़ना”। रिमाइंडर आने पर आप काम कर लेंगे। आदतों को अलग पहचान देने के लिए “आदतें” नाम का अलग कैलेंडर बना लें और उसका रंग अलग रखें।

सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि आपको कुछ नया सीखना नहीं पड़ता। डेटा आपके Google खाते में रहता है, इसलिए फ़ोन बदलने पर भी वापस मिल जाता है। साथ ही पूरी दिनचर्या एक जगह देखने पर पता चलता है कि कहाँ समय खाली है और कहाँ ठूँसा हुआ है। कई बार हम एक ही समय पर तीन आदतें रख देते हैं, जो हो ही नहीं सकतीं। कैलेंडर यह ग़लती तुरंत दिखा देता है।

कमी यह है कि इसमें स्ट्रीक या प्रगति का हिसाब नहीं होता। यह नहीं बताएगा कि इस महीने आपने कितने दिन कसरत की। वह जानकारी आपको ख़ुद लिखनी पड़ेगी। इसलिए यह तरीक़ा उनके लिए ठीक है जिन्हें सिर्फ़ समय तय करने और याद दिलाने की ज़रूरत है, विस्तृत विश्लेषण की नहीं।

5. आँकड़े पसंद करने वालों के लिए HabitNow

कुछ लोगों को सिर्फ़ यह नहीं देखना कि आज क्या करना है। उन्हें जानना होता है कि पिछले महीने कैसा रहा, किस हफ़्ते वे सबसे नियमित थे और कौन-सी आदत सबसे ज़्यादा टूटती है। ऐसे लोगों के लिए HabitNow एक अच्छा विकल्प है, क्योंकि यह आदतों के साथ रोज़ के काम और दिनचर्या भी एक जगह संभाल देता है।

HabitNow में हर आदत के लिए समय, आइकन और रंग चुना जा सकता है। होम स्क्रीन पर आज की आदतें दिखती हैं और टैप करते ही काम दर्ज हो जाता है। जो आदतें समय पर निर्भर हैं, जैसे सुबह की दवा, उनके लिए तय समय पर नोटिफ़िकेशन आता है। जो आदतें गिनती वाली हैं, जैसे पाँच गिलास पानी, उनमें हर बार गिनती बढ़ाई जा सकती है।

असली फ़ायदा इसके आँकड़ों वाले हिस्से में है, जहाँ आप हर आदत का साप्ताहिक और मासिक ब्योरा देख सकते हैं। शायद आप पाएँ कि हर महीने के आख़िरी हफ़्ते में आदतें टूटती हैं, क्योंकि तब दफ़्तर का काम बढ़ जाता है। यह जानकारी आपको पहले से तैयार रहने देती है। उस हफ़्ते आप आदत को छोटा कर सकते हैं, जैसे आधे घंटे की सैर की जगह पंद्रह मिनट।

एक अच्छी तरकीब यह है कि छूटे हुए दिन का कारण अपने पास लिख लें, जैसे “बारिश की वजह से बाहर नहीं गया” या “देर रात तक काम किया”। कुछ हफ़्तों बाद पैटर्न साफ़ दिखने लगता है। अगर बारिश वाले दिनों में सैर हमेशा छूटती है, तो घर के अंदर करने वाली कसरत का विकल्प रख लीजिए। इसके कुछ फ़ीचर सिर्फ़ पेड वर्ज़न में मिलते हैं, इसलिए पहले मुफ़्त वर्ज़न को कुछ हफ़्ते आज़माकर देखें।

6. बहुत-सी आदतें एक साथ संभालने के लिए Notion

Notion असल में हैबिट ट्रैकर नहीं है, लेकिन आप उसे एक बना सकते हैं। यह एक तरह की डिजिटल कॉपी है, जिसमें टेबल, सूचियाँ और पन्ने जोड़े जा सकते हैं। जिन लोगों को पढ़ाई, काम और निजी ज़िंदगी एक ही जगह संभालनी होती है, उनके लिए यह काफ़ी काम का है। एक पन्ना बनाइए, उसमें टेबल रखिए, हर कॉलम में एक आदत लिखिए और हर पंक्ति में तारीख़ डालिए। रोज़ रात को आप उसमें टिक लगाते हैं।

इसका फ़ायदा यह है कि ट्रैकर बिल्कुल अपने हिसाब से बनता है। किसी को पाँच आदतें चाहिए, किसी को बीस। कोई हर आदत के साथ छोटा नोट लिखना चाहता है, कोई हफ़्ते का सार। चाहें तो आदतों के साथ अपने ख़र्च, पढ़ाई के नोट और यात्रा की योजना भी वहीं रख सकते हैं।

लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इसे सेट करने में समय लगता है। जो व्यक्ति सिर्फ़ एक सादा टिक-बॉक्स चाहता है, उसके लिए टेबल बनाना और पन्ना सजाना भारी काम लग सकता है। शुरुआत में आप जोश में बड़ा-सा सिस्टम बना लेंगे, लेकिन रोज़ उसे भरना थकाऊ हो सकता है। मोबाइल ऐप पर कई बार टेबल बनाना और बदलना डेस्कटॉप जितना आसान नहीं लगता।

अगर आप पहले से Notion इस्तेमाल करते हैं, तो आदतों के लिए अलग ऐप की ज़रूरत नहीं। एक बार अच्छा टेम्पलेट बना लें और रोज़ भरें। लेकिन अगर आपने कभी Notion नहीं चलाया, तो पहले कोई तैयार ट्रैकर ऐप आज़माएँ और Notion को बाद में देखें।

7. दो और विकल्प: Habitify और TickTick

अगर ऊपर के ऐप आपको पूरी तरह जमे नहीं, तो दो और नाम देखने लायक हैं। Habitify सीधे हैबिट ट्रैकिंग के लिए बना ऐप है। इसका इंटरफ़ेस साफ़-सुथरा है, आदतों को दिन, हफ़्ते या महीने के लक्ष्य के हिसाब से रखा जा सकता है, रिमाइंडर लगते हैं और प्रगति के आँकड़े दिखते हैं। जिन आदतों में समय लगता है, जैसे पढ़ना या ध्यान, उनके लिए टाइमर जैसी सुविधा भी मिलती है। इसके मुफ़्त वर्ज़न में कुछ सीमाएँ हैं, इसलिए डाउनलोड करने के बाद देख लें कि आपकी ज़रूरत उसमें पूरी होती है या नहीं।

TickTick असल में काम की सूची और कैलेंडर वाला ऐप है, जिसमें हैबिट ट्रैकिंग और फ़ोकस टाइमर भी जुड़े हैं। यह उनके लिए ठीक है जो रोज़ के काम और आदतें अलग-अलग ऐप में नहीं रखना चाहते। एक ही जगह पर “आज क्या करना है” और “कौन-सी आदत निभानी है” दिख जाता है। इसमें भी कुछ सुविधाएँ पेड प्लान के साथ आती हैं, इसलिए पहले मुफ़्त हिस्सा आज़माएँ।

इन दोनों में से कोई भी चुनें, तो वही नियम लागू होता है। पहले हफ़्ते में सिर्फ़ तीन आदतें डालें और देखें कि क्या आप रोज़ ऐप खोल पा रहे हैं। अगर नहीं, तो ऐप बदलने से पहले आदतों की संख्या घटाइए।

8. दोस्तों या परिवार के साथ आदतें बनाना

अकेले आदत बनाना मुश्किल होता है, लेकिन कोई साथी साथ हो तो काम आसान लगता है। Habitica जैसे ऐप में पार्टी बनाकर साथ चलने का विकल्प है। ऐप न भी हो, तो आप और आपका कोई दोस्त तय कर सकते हैं कि रोज़ सुबह छह बजे उठकर एक-दूसरे को संदेश भेजेंगे। अकेले अलार्म बंद करके सो जाना आसान है, लेकिन जब पता हो कि दोस्त आपके संदेश का इंतज़ार कर रहा है, तो उठना पड़ता है।

इसमें एक सावधानी भी है। अगर समूह का कोई सदस्य लगातार छोड़ रहा है, तो बाकी लोगों का मन भी उतर सकता है। कई बार लोग शर्म से बचने के लिए झूठा टिक लगा देते हैं, जिससे पूरा मक़सद ख़त्म हो जाता है। इसलिए समूह छोटा रखें, दो से चार लोग काफ़ी हैं, और शुरू में ही मान लें कि किसी दिन छूट जाए तो कोई बात नहीं।

घर में बच्चे हों तो एक साझा बोर्ड बनाना अच्छा काम करता है। रोज़ दाँत साफ़ करना, होमवर्क करना और स्क्रीन का समय घटाना जैसी आदतें काग़ज़ पर या ऐप में लिखें और हफ़्ता पूरा होने पर कोई छोटा इनाम दें। इससे बच्चे को भी मज़ा आता है और आपकी अपनी आदतें भी टिकी रहती हैं।

9. शुरू करने से पहले ये ग़लतियाँ टालें

सबसे बड़ी ग़लती है एक साथ बहुत सारी आदतें जोड़ना। पहली बार ट्रैकर चलाएँ तो तीन से ज़्यादा आदतें न रखें। एक सेहत से जुड़ी हो, एक काम या पढ़ाई से, और एक अपने विकास से। जैसे रोज़ बीस मिनट सैर, रोज़ दस पन्ने पढ़ना और रोज़ पाँच मिनट ध्यान।

दूसरी ग़लती है आदत को बहुत बड़ा रखना। “रोज़ एक घंटा जिम” पहले दिन से निभाना मुश्किल है। उससे अच्छा है “रोज़ पंद्रह मिनट कसरत” रखें और आदत पक्की होने पर समय बढ़ाएँ। छोटी आदत पूरी करने का संतोष आपको आगे बढ़ाता है, जबकि बड़ी आदत छूटने का अपराधबोध रोक देता है।

तीसरी ग़लती है रिमाइंडर को अनदेखा करना। कई लोग नोटिफ़िकेशन को स्वाइप करके हटा देते हैं और सोचते हैं कि बाद में कर लेंगे, पर बाद में वह आता ही नहीं। जैसे ही याद दिलाने की आवाज़ आए, काम शुरू करने की कोशिश करें। उस समय संभव न हो तो ऐप में उस आदत का समय दिन के किसी और हिस्से में खिसका दें, पर उसे हटाएँ नहीं।

चौथी ग़लती है हर दिन पूरी तरह सही होने की चाहत। कोई भी इंसान हर दिन शत-प्रतिशत नहीं दे सकता। किसी दिन बीमारी होगी, किसी दिन सफ़र, किसी दिन बस मन नहीं करेगा। यह सामान्य है। असली बात यह है कि एक दिन छूटने के बाद अगले दिन फिर शुरू करें। जो लोग एक दिन छूटने पर पूरा महीना छोड़ देते हैं, वे आदत पक्की नहीं कर पाते।

10. रोज़ इस्तेमाल के लिए एक छोटी चेकलिस्ट

नीचे एक सरल चेकलिस्ट है। इसे डायरी में लिख लें या फ़ोन के नोट्स में सहेज लें। हर रात सोने से पहले दो मिनट निकालकर इसे देख लें।

  • आज की तीन आदतें क्या थीं? तीनों हुईं या नहीं?
  • जो आदत छूटी, उसका कारण क्या था? बाहरी मजबूरी या अपना आलस?
  • क्या रिमाइंडर सही समय पर आया? अगर नहीं, तो समय बदलना है।
  • क्या कोई आदत बहुत बड़ी लग रही है? तो उसे आधा कर दें।
  • क्या आप अपनी प्रगति किसी दोस्त को दिखा सकते हैं? तो आज ही दिखाएँ।
  • कल की सबसे पहली आदत कौन-सी है और उसका रिमाइंडर लगा है या नहीं?
  • क्या इस हफ़्ते का कोई दिन पूरी तरह छूट गया? तो अगले हफ़्ते उस दिन को हल्का रखें।
  • क्या ऐप खोलने में दिक़्क़त हो रही है? अगर ऐप ही धीमा है, तो दूसरा आज़माएँ।
  • क्या आप अपनी जीत का कोई छोटा इनाम दे रहे हैं, जैसे हफ़्ता पूरा होने पर पसंदीदा पकवान?
  • क्या आप ख़ुद पर ज़्यादा सख़्त तो नहीं हो रहे? चूक हो तो ख़ुद को डाँटें नहीं, बस अगला दिन बेहतर करें।

यह चेकलिस्ट कोई जादू नहीं है। यह बस आपको रोज़ थोड़ा सजग रखती है। धीरे-धीरे ऐप खोलना, टिक लगाना और अपनी कड़ी बढ़ती देखना ख़ुद एक आदत बन जाता है। और जिस दिन आपको लगे कि आदतें अपने आप चल रही हैं और ऐप की ज़रूरत नहीं रही, उस दिन समझिए कि आपने ट्रैकिंग सही तरीक़े से की।