किसानों के लिए उपयोगी 7 मोबाइल ऐप्स

मौसम, मंडी भाव, फसल की बीमारी और सरकारी योजनाओं के लिए किसानों के काम आने वाले सात ऐप्स की सीधी सूची, और नक़ली ऐप व झूठे संदेशों से बचने के आसान तरीक़े।

किसानों के लिए उपयोगी 7 मोबाइल ऐप्स

सुबह के साढ़े पाँच बजे हैं। रमेश काका ने चाय का कप नीचे रखा और आसमान की ओर देखा। बादल घने हैं, पर बारिश का भरोसा नहीं। गेहूँ की फसल कटने को है और अगर तेज़ हवा चली तो सारी मेहनत बिगड़ सकती है। पहले ऐसे समय वे बस अंदाज़े से चलते थे या रेडियो पर मौसम का बुलेटिन सुनते थे। अब बेटा फ़ोन खोलकर बता देता है कि अगले दिनों में बारिश और हवा का क्या हाल रह सकता है।

यह किसी बड़े शहर की बात नहीं है। गाँवों और कस्बों में स्मार्टफ़ोन अब आम है, और किसान उसे सिर्फ़ बात करने या वीडियो देखने तक सीमित नहीं रख रहे। सही ऐप से मौसम, मंडी के भाव, फसल की बीमारी और सरकारी योजनाओं जैसे फ़ैसले आसान हो जाते हैं। इस लेख में 7 ऐसे ऐप के बारे में बात होगी, जिनमें ज़्यादातर सरकारी संस्थाओं के हैं। इनके फ़ीचर और नाम समय के साथ बदल सकते हैं, इसलिए इंस्टॉल करते समय Play Store पर डेवलपर का नाम ज़रूर देखें। भाषा बदलने का विकल्प ज़्यादातर ऐप की सेटिंग में मिल जाता है।

1. Meghdoot: ज़िले के हिसाब से मौसम और खेती की सलाह

खेती में पहला सवाल हमेशा मौसम का होता है। बुवाई से कटाई तक हर कदम पर बारिश, तापमान और हवा की जानकारी चाहिए। रेडियो या टीवी का आम मौसम समाचार बड़े इलाक़े की बात करता है, जबकि आपके खेत का हाल कुछ और हो सकता है।

Meghdoot भारत सरकार की संस्थाओं (मौसम विभाग, IITM और ICAR) का मिलकर बनाया ऐप है। इसमें ज़िले के स्तर का मौसम पूर्वानुमान और उसके साथ फसलों के लिए कृषि सलाह मिलती है। मतलब सिर्फ़ यह नहीं कि बारिश होगी, बल्कि यह भी कि ऐसे मौसम में खेत में क्या सावधानी रखें। ऐप में लोकेशन चालू रखें और अपना ज़िला चुनें।

मौसम ऐप का सही इस्तेमाल

  • रोज़ सुबह और शाम आने वाले एक-दो दिन का पूर्वानुमान देखने की आदत डालें।
  • सिर्फ़ बारिश का चिह्न देखकर फ़ैसला न करें, बारिश की संभावना भी देखें।
  • हवा की गति पर ध्यान दें, ख़ासकर जब फसल पककर तैयार हो।
  • छिड़काव या खाद डालने से पहले अगले दो दिन का मौसम देख लें।

आम चूक यह है कि लोग सिर्फ़ आज का मौसम देखकर खेत का काम तय कर देते हैं। अगर कल बारिश की संभावना ज़्यादा है तो आज किया गया छिड़काव बहकर बेकार जा सकता है। इसलिए कम से कम अगले 48 घंटे का हाल ज़रूर देखें। पूर्वानुमान सटीक गारंटी नहीं होता, इसलिए बड़ा फ़ैसला करने से पहले आसमान और स्थानीय अनुभव भी देख लें।

2. Damini: बिजली गिरने की चेतावनी

खेतों में काम करने वालों के लिए आकाशीय बिजली एक गंभीर ख़तरा है। मानसून के मौसम में खुले खेत, पेड़ के नीचे या पानी के पास खड़े लोगों पर बिजली गिरने का जोखिम बढ़ जाता है। Damini ऐप इसी के लिए बनाया गया है। इसे भारत सरकार के संस्थानों ने तैयार किया है और यह आपके आसपास के इलाक़े में बिजली गिरने की संभावना की चेतावनी भेजता है।

इसकी चेतावनी का मतलब है कि सतर्क हो जाएँ। अलर्ट आए तो खुले खेत में न रुकें, किसी पक्की इमारत में चले जाएँ और अकेले पेड़ के नीचे शरण न लें। यह भी याद रखें कि ऐप का अलर्ट पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं है। अगर आसमान में बिजली कड़क रही है, तो ऐप का इंतज़ार किए बिना सुरक्षित जगह पर चले जाएँ।

इसके लिए ये सेटिंग रखें

  • नोटिफ़िकेशन और लोकेशन की अनुमति चालू रखें, वरना अलर्ट नहीं आएगा।
  • खेत पर नेटवर्क कमज़ोर हो तो घर या गाँव में रहते हुए पहले से अलर्ट जाँच लें।
  • परिवार के बाकी सदस्यों के फ़ोन में भी यह ऐप डलवा दें।

3. Kisan Suvidha: मंडी भाव, मौसम और सलाह एक जगह

फसल बेचते समय सबसे बड़ा डर यही रहता है कि सही दाम न मिले। जानकारी की कमी का फ़ायदा अक्सर बिचौलिए उठाते हैं। अगर आपके पास आसपास की मंडियों के ताज़ा भाव हों, तो आप मोलभाव में कमज़ोर नहीं पड़ेंगे।

Kisan Suvidha कृषि मंत्रालय का ऐप है, जिसमें मौसम, आसपास की मंडियों के भाव, पौध संरक्षण की जानकारी, बीज और खाद की दुकानों जैसी जानकारियाँ एक जगह मिलती हैं। यानी रोज़ के कई काम के लिए अलग-अलग ऐप खोलने की ज़रूरत कम पड़ती है।

मंडी भाव देखते समय ध्यान रखें

  • सिर्फ़ नज़दीकी मंडी नहीं, आसपास की दो-तीन मंडियों की तुलना करें।
  • भाव दिन में बदल सकते हैं, इसलिए बेचने से ठीक पहले ताज़ा जानकारी देखें।
  • फसल की गुणवत्ता से भाव बदलता है। ऐप में दिखा भाव आम तौर पर औसत या अधिकतम होता है, आपकी उपज का नहीं।
  • दूर की मंडी में भाव अच्छा दिखे तो ढुलाई, मज़दूरी और समय का ख़र्च जोड़कर हिसाब लगाएँ, फिर फ़ैसला लें।

कई राज्यों के कृषि विभाग के अपने ऐप भी हैं, जिनमें स्थानीय मंडियों की जानकारी जल्दी अपडेट होती है। अपने राज्य का आधिकारिक ऐप हो तो उसे भी साथ रखें।

4. e-NAM: ऑनलाइन मंडी से बेचने का मौक़ा

e-NAM यानी राष्ट्रीय कृषि बाज़ार सरकार का ऑनलाइन व्यापार प्लेटफ़ॉर्म है, जो अलग-अलग मंडियों को जोड़ता है। इसमें किसान अपनी उपज की जानकारी डालते हैं और ऑनलाइन बोली के ज़रिए व्यापारी दाम लगाते हैं। इसका मक़सद यह है कि किसान को सिर्फ़ अपने इलाक़े के कुछ व्यापारियों पर निर्भर न रहना पड़े।

इसकी एक अहम बात यह है कि इस पर काम तभी हो पाता है जब आपकी मंडी इस प्रणाली से जुड़ी हो। हर मंडी और हर फसल इसमें शामिल नहीं है, इसलिए पहले अपनी मंडी में पता करें कि e-NAM चलता है या नहीं। पंजीकरण में आम तौर पर पहचान और बैंक खाते की जानकारी लगती है।

e-NAM इस्तेमाल करने से पहले

  • नज़दीकी मंडी में पूछ लें कि e-NAM पर कौन-सी फसलें बिकती हैं।
  • पंजीकरण के लिए ज़रूरी कागज़ात और बैंक खाते की जानकारी सही रखें।
  • नमूने की गुणवत्ता और ग्रेडिंग के बारे में मंडी के कर्मचारियों से पूरी बात समझ लें।
  • भुगतान की शर्तें और समय पहले साफ़ कर लें।

ऑनलाइन बिक्री का फ़ायदा यह हो सकता है कि दाम की तुलना आसान होती है, पर इससे परंपरागत मंडी का हिसाब पूरी तरह नहीं बदलता। अपने इलाक़े का भाव देखकर ही फ़ैसला करें।

5. Plantix: फ़ोटो से फसल की समस्या की पहचान

खेत में फसल पीली पड़ रही है, पत्तियों पर धब्बे हैं या कीड़ा लग गया है। ऐसे में पहले किसान या तो अनुभव से अंदाज़ा लगाते थे या दुकानदार से पूछते थे। कई बार ग़लत दवा छिड़कने से फसल और बिगड़ जाती थी और पैसा भी जाता था।

Plantix ऐसा ऐप है जिसमें आप प्रभावित पत्ती या पौधे की फ़ोटो खींचते हैं और ऐप संभावित बीमारी, पोषक तत्व की कमी या कीड़े का अंदाज़ा देता है, साथ में रोकथाम के तरीक़े बताता है। इसमें हिंदी समेत कई भाषाएँ मिलती हैं। इसका इस्तेमाल मुफ़्त शुरू किया जा सकता है, पर वह सिर्फ़ संभावना बताता है, पक्का निदान नहीं।

सही पहचान के लिए फ़ोटो ऐसे लें

  1. अच्छी रोशनी में फ़ोटो लें, तेज़ धूप में सीधे या अँधेरे में नहीं।
  2. प्रभावित हिस्से के साथ स्वस्थ हिस्सा भी फ़्रेम में रखें, ताकि फ़र्क़ साफ़ दिखे।
  3. एक से ज़्यादा फ़ोटो लें, अलग-अलग पत्तियों और तने की।
  4. फ़ोन को स्थिर पकड़ें, ताकि फ़ोटो धुँधली न हो।

ऐप की सलाह को अंतिम न मानें। कोई भी कीटनाशक या दवा इस्तेमाल करने से पहले अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग के अधिकारी से पूछ लें, और दवा की मात्रा लेबल के अनुसार ही रखें। किसान कॉल सेंटर का टोल-फ़्री नंबर 1800-180-1551 भी फ़ोन पर सलाह के लिए है, जिस पर आप अपनी भाषा में बात कर सकते हैं।

6. PM-Kisan ऐप: योजना की स्थिति देखना

केंद्र और राज्य सरकारें किसानों के लिए कई योजनाएँ चलाती हैं, जैसे बीज पर अनुदान, फसल बीमा, सिंचाई में मदद और सीधे बैंक खाते में सहायता। जानकारी के अभाव में बहुत-से किसान इनका फ़ायदा नहीं उठा पाते।

पीएम-किसान सम्मान निधि का सरकारी ऐप इसी के लिए है। इसमें लाभार्थी अपनी स्थिति, भुगतान की जानकारी और अपने पंजीकरण में हुई कमी जाँच सकते हैं, और ई-केवाईसी जैसी प्रक्रियाएँ भी कुछ सुविधा से हो सकती हैं। किस्त की रक़म और नियम समय-समय पर बदल सकते हैं, इसलिए अंतिम जानकारी ऐप या आधिकारिक पोर्टल पर ही देखें।

योजनाओं का फ़ायदा उठाने का तरीक़ा

  • सिर्फ़ आधिकारिक ऐप या वेबसाइट इस्तेमाल करें। नाम से मिलता-जुलता नक़ली ऐप भी हो सकता है।
  • किसी भी योजना के लिए ज़रूरी कागज़ात की सूची पहले से देख लें और तैयार रखें।
  • आवेदन की आख़िरी तारीख़ फ़ोन के कैलेंडर में लिख लें।
  • अपना आधार, बैंक खाता और मोबाइल नंबर एक-दूसरे से जुड़े और सही रखें।

7. Soil Health Card: मिट्टी की जाँच का हिसाब

हर खेत की मिट्टी अलग होती है। किसी में नाइट्रोजन कम है, किसी में पोटाश ज़्यादा। बिना जाँचे खाद डालना ऐसा है जैसे बुखार नापे बिना दवा खा लेना। ज़रूरत से ज़्यादा खाद मिट्टी बिगाड़ती है और लागत भी बढ़ाती है।

सरकार की Soil Health Card योजना में किसान की मिट्टी की जाँच होती है और रिपोर्ट के साथ बताया जाता है कि किस पोषक तत्व की कितनी ज़रूरत है। इस योजना की रिपोर्ट और जानकारी सरकारी पोर्टल और उससे जुड़े ऐप पर मिलती है। कौन-सा ऐप या पोर्टल आपके राज्य में चलता है, यह अपने कृषि विभाग से पूछ लें।

मिट्टी का नमूना ऐसे लें

  1. खेत के कई अलग-अलग हिस्सों से मिट्टी लें, पूरे खेत में टेढ़े-मेढ़े चलते हुए।
  2. खाद के ढेर, मेंड़ और पेड़ के पास की जगह से नमूना न लें।
  3. ऊपर की सतह हटाकर करीब 15 सेंटीमीटर गहराई तक से मिट्टी निकालें।
  4. सारी मिट्टी मिलाकर एक नमूना बनाएँ और छाँव में सुखा लें।
  5. नज़दीकी मिट्टी जाँच केंद्र पर जमा करें और रिपोर्ट की प्रति संभालकर रखें।

रिपोर्ट मिलने के बाद खाद और उर्वरक उसकी सलाह के हिसाब से ही डालें। मिट्टी की जाँच आम तौर पर कुछ साल में दोबारा कराना अच्छा रहता है, क्योंकि फसल चक्र के साथ मिट्टी के तत्व बदलते हैं। जाँच के समय की सही अवधि अपने कृषि विभाग से पूछ लें।

नक़ली ऐप और झूठे संदेशों से कैसे बचें

किसानों को निशाना बनाकर चलने वाले फ़र्ज़ी संदेश आम हैं। WhatsApp पर ऐसे संदेश घूमते रहते हैं कि सरकार हर किसान को पैसे दे रही है, बस यह लिंक खोलकर ऐप डाउनलोड कर लें। कई बार ये ऐप फ़ोन की जानकारी चुराने या खाते से पैसे निकालने के लिए बनाए जाते हैं। सरकारी योजनाओं के लिए पैसे माँगने वाले किसी भी संदेश पर भरोसा न करें।

  • ऐप हमेशा Play Store से ही इंस्टॉल करें, WhatsApp पर आए किसी फ़ाइल या लिंक से नहीं।
  • इंस्टॉल से पहले डेवलपर का नाम देखें, वह सरकारी संस्था या मंत्रालय का होना चाहिए।
  • किसी को भी OTP, बैंक पिन या आधार की पूरी जानकारी फ़ोन या संदेश पर न दें।
  • शक हो तो अपने गाँव के कृषि अधिकारी या नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से पूछ लें।

शुरुआत के लिए एक छोटी चेकलिस्ट

सारे ऐप एक साथ इंस्टॉल करने की ज़रूरत नहीं। धीरे-धीरे शुरू करें और जो आपके काम का लगे, उसे रोज़ इस्तेमाल करने की आदत डालें। नीचे की चेकलिस्ट से हफ़्ते भर की योजना बनाने में आसानी होगी।

  • आज ही फ़ोन में Meghdoot खोलकर अपना ज़िला चुनें और अगले कुछ दिन का मौसम देखें।
  • परिवार के फ़ोन में Damini डलवाकर नोटिफ़िकेशन की अनुमति चालू करें।
  • अपनी मुख्य फसल का भाव दो अलग-अलग मंडियों में देखकर नोट करें।
  • फसल में कोई समस्या हो तो साफ़ फ़ोटो खींचकर Plantix में देखें, फिर कृषि विज्ञान केंद्र से पुष्टि करें।
  • अपने खाते की योजना की स्थिति आधिकारिक ऐप से जाँचें।
  • इस साल मिट्टी की जाँच कराई है या नहीं, यह देखें।
  • अपने खेतों का सादा रिकॉर्ड, जैसे बुवाई की तारीख़, खाद-दवा की मात्रा और कटाई-बिक्री का भाव, फ़ोन के नोट्स में रखना शुरू करें।

मोबाइल ऐप खेती की मेहनत कम नहीं करते, पर वे आपके फ़ैसलों को सही दिशा दे सकते हैं। सही जानकारी समय पर मिल जाए तो नुक़सान का डर घटता है। रमेश काका की तरह आप भी सुबह की चाय के साथ फ़ोन पर मौसम और भाव देखने की आदत बना लें, तो खेती का तरीक़ा थोड़ा-थोड़ा बदलने लगेगा।